वर्तमान प्रगतिशील भारत में विद्यालयों की संख्या निरन्तर बढ़ रही है। प्रत्येक विद्यालय विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करने के लिए कटिबद्ध है। मैं चाहती हूँ कि हमारे विद्यालय में विकासोन्मुख विद्यार्थी चतुर्दिक सम्यक् ज्ञान के साथ सुसंस्कारों से भी अभिसिंचित होते रहें, ताकि उपलब्धियों से पूर्व उनका सुसंस्कृत व्यवहार ही उनकी पहचान बने। संस्कारजनित आत्मविश्वास और दैवीय शांति उनके हौसलों को पंख लगाकर उन्हें हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार करे।
बी.एल.एम. में हम मोती चुनते नहीं, अपितु हर बालक को मोती बनाने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
श्रीमती आदेश अग्रवाल
(अध्यक्षा)